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यूपी SIR: हर पांचवां वोटर लिस्ट से बाहर, 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से कटे

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Written by
Md Alamgir


46 लाख मृत मतदाताओं के नाम हटे, अब प्रदेश में 12.55 करोड़ वोटर शेष

उत्तर प्रदेश में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR – Special Intensive Revision) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव सामने आए हैं। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के अनुसार प्रदेश में हर पांचवां मतदाता सूची से बाहर हो गया है। कुल 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए, जिनमें 46 लाख मृत व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। इस प्रक्रिया के बाद अब उत्तर प्रदेश में 12.55 करोड़ मतदाता बचे हैं।

क्या है SIR और क्यों जरूरी?

चुनाव आयोग द्वारा समय-समय पर मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण कराया जाता है। इसका उद्देश्य है—

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  • मृत मतदाताओं के नाम हटाना

  • स्थानांतरित (माइग्रेटेड) लोगों के डुप्लीकेट नाम हटाना

  • एक से अधिक जगह दर्ज नामों को समाप्त करना

  • फर्जी और अवैध प्रविष्टियों पर रोक

उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में यह प्रक्रिया इसलिए भी अहम मानी जाती है, क्योंकि यहां की मतदाता संख्या कई देशों की आबादी के बराबर है।

ड्राफ्ट लिस्ट में क्यों कटे इतने नाम?

चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, ड्राफ्ट सूची से नाम कटने के प्रमुख कारण ये रहे—

  1. मृत मतदाता: करीब 46 लाख ऐसे नाम पाए गए, जिनके निधन की पुष्टि हुई।

  2. स्थान परिवर्तन: लाखों लोग रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से दूसरे जिलों/राज्यों में बस चुके हैं।

  3. डुप्लीकेट एंट्री: एक ही व्यक्ति का नाम दो या अधिक जगह दर्ज होना।

  4. रिकॉर्ड अपडेट न होना: वर्षों से सत्यापन न होने के कारण कई प्रविष्टियां अमान्य पाई गईं।

राजनीतिक हलकों में हलचल

इतने बड़े पैमाने पर नाम कटने से राजनीतिक दलों में चिंता और बहस दोनों तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों ने आशंका जताई है कि कहीं वास्तविक मतदाताओं के नाम भी गलती से तो नहीं कट गए। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि यह केवल ड्राफ्ट सूची है और अभी सुधार का पूरा अवसर दिया जाएगा।

आम मतदाताओं के लिए क्या जरूरी?

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि—

  • ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन के बाद दावे और आपत्तियों का समय मिलेगा

  • यदि किसी मतदाता का नाम गलती से हट गया है, तो वह फॉर्म भरकर दोबारा जुड़वा सकता है

  • बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए सत्यापन संभव है

अब ड्राफ्ट सूची पर आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। आयोग का दावा है कि इससे चुनाव प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनेगी।

लोकतंत्र के लिए संदेश

विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की रीढ़ है। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में नाम कटना यह भी संकेत देता है कि निरंतर अपडेट और जागरूकता की जरूरत है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए।

कुल मिलाकर, यूपी में SIR के आंकड़े चौंकाने वाले जरूर हैं, लेकिन अंतिम सूची आने तक सभी की नजरें चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके निष्पक्ष क्रियान्वयन पर टिकी रहेंगी

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