
भारत–रूस संबंधों में नई रफ्तार? ‘सवा लाख करोड़ की डील’ की चर्चा के बीच समझौतों का असल सच क्या है
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिसंबर दौरे के बाद भारत–रूस संबंधों को लेकर कई दावे सामने आए हैं। सोशल मीडिया और कुछ अनौपचारिक रिपोर्टों में यह कहा जा रहा है कि भारत ने रूस के साथ “सवा लाख करोड़ रुपये की एक बड़ी डील” को अंतिम रूप दे दिया है। लेकिन सरकारी सूत्रों और आधिकारिक दस्तावेजों की समीक्षा से पता चलता है कि यह दावा भ्रामक है।
क्या वास्तव में सवा लाख करोड़ का कोई समझौता हुआ?
सरकारी स्तर पर ऐसी कोई भी डील आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है जिसका मूल्य ₹1,25,000 करोड़ के आसपास हो। न रक्षा मंत्रालय, न विदेश मंत्रालय और न ही रूस की ओर से किसी एकल बड़े करार की पुष्टि की गई है।
हालाँकि, यह बात सच है कि भारत–रूस के बीच कुल कारोबार, ऊर्जा आयात और संभावित रक्षा सहयोग का पैमाना कई लाख करोड़ तक पहुँच सकता है, जिस वजह से “सवा लाख करोड़ की डील” जैसा दावा चर्चा में आया है।
दौरे के दौरान क्या हुआ?
पुतिन–मोदी बैठक के दौरान कई अहम क्षेत्रों में समझौते और वार्ताएँ हुईं—
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ऊर्जा क्षेत्र: कच्चे तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल सहयोग बढ़ाने पर सहमति।
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रक्षा सहयोग: संयुक्त उत्पादन, स्पेयर पार्ट्स सप्लाई और भविष्य की खरीद पर चर्चा, लेकिन कोई बड़ा नया करार घोषित नहीं।
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परमाणु ऊर्जा: कुडनकुलम परियोजना की प्रगति पर बात।
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श्रम और कौशल समझौता: रूस में भारतीय कामगारों के लिए नई व्यवस्था।
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व्यापार लक्ष्य: 2030 तक भारत–रूस व्यापार को 100 अरब डॉलर यानी लगभग 8–9 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया।
यही व्यापार लक्ष्य संभवतः उस “सवा लाख करोड़” वाले दावे का आधार बन रहा है।
तेल आयात पर भी गलतफहमी
कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि भारत ने पिछले दो–तीन वर्षों में रूस से लगभग ₹1.5 लाख करोड़ का तेल और ईंधन खरीदा है।
यह कुल आयात खर्च है, न कि कोई एकल डील।
इसे भी गलत तरीके से “नई डील” के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।
सरकार की स्पष्टता क्या कहती है?
रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में बयान जारी कर यह स्पष्ट किया कि—
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रूस के साथ कोई नया भारी रक्षा करार हाल में साइन नहीं हुआ।
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मीडिया की कुछ रिपोर्ट्स “भ्रम फैलाने वाली” हैं।
इससे साफ है कि आधिकारिक स्तर पर बड़ी डील की पुष्टि नहीं है।
भारत–रूस रिश्तों का असल परिदृश्य
डील चाहे घोषित हो या न हो, यह तय है कि—
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भारत–रूस आर्थिक और रणनीतिक संबंध पहले से ज्यादा सक्रिय हो रहे हैं।
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ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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दोनों देश मिलकर आने वाले सालों में कारोबार को कई गुना बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।
निष्कर्ष
“सवा लाख करोड़ रुपये की डील” जैसी बातें फिलहाल तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
लेकिन यह भी सच है कि आने वाले वर्षों में भारत–रूस सहयोग का कुल मूल्य कई लाख करोड़ तक जा सकता है।
पुतिन का हालिया दौरा दोनों देशों के संबंधों को नई गति देने वाला रहा है, और भविष्य में बड़े करारों की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।








