
तख्तापलट के डेढ़ साल बाद देश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव तय हो गया है, जो 2024 के बड़े आंदोलन और शेख हसीना के सत्ता से हटाए जाने के बाद पहला संसदीय चुनाव होगा।
चुनाव की तारीख और प्रक्रिया
बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त ए.एम.एम. नासिर उद्दीन ने घोषणा की है कि 13वीं राष्ट्रीय संसद के लिए वोटिंग 12 फरवरी 2026 को आयोजित होगी। साथ ही इसी दिन एक जनमत संग्रह (रेफरेंडम) भी कराया जाएगा, जिसमें “जुलाई चार्टर” नामक राजनीतिक और संवैधानिक सुधार प्रस्ताव पर जनता की राय ली जाएगी।
चुनाव कार्यक्रम के अनुसार नामांकन की प्रक्रिया दिसंबर के अंत तक पूरी होगी, जनवरी में कागज़ात जांचे जाएंगे और उम्मीदवार 20 जनवरी तक अपनी उम्मीदवारी वापस ले सकते हैं। विदेशों में रहने वाले बांग्लादेशी नागरिक भी ऑनलाइन पंजीकरण के बाद वोट डाल सकेंगे।
तख्तापलट के पहले चुनाव का महत्व
यह चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले बड़े आंदोलन और हिंसा के बाद पहले लोकतांत्रिक मतदान का मौका है, जिसमें तब की प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाया गया और उन्होंने देश छोड़ दिया। तब से देश में इंटरिम सरकार नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में कार्यरत है।
क्या शेख हसीना की पार्टी चुनाव लड़ पाएगी?
सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है: क्या शेख हसीना की पार्टी — अवामी लीग — चुनाव में भाग लेगी?
हाल के फैसलों के अनुसार अवामी लीग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है और उसकी पार्टी पंजीकरण निलंबित कर दिया गया है, जिससे वह 12 फरवरी के चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाएगी।
इस प्रतिबंध ने चुनावी प्रतिस्पर्धा का समीकरण बदल दिया है। अवामी लीग लंबे समय से बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी रही है और शेख हसीना 15 साल से सत्ता में थीं। अब उनके बिना चुनाव में बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) और जमात-ए-इस्लामी जैसे दलों को प्रमुख स्थान मिलने की संभावना है।
हालाँकि, शेख हसीना ने खुद यह चेतावनी दी है कि अगर उनकी पार्टी हटाई जाती है तो उनके समर्थक चुनाव का बहिष्कार कर सकते हैं। वह भारत में निर्वासन में हैं और कहा है कि वह बिना अवामी लीग के लौटने का विचार भी नहीं रखतीं।
राजनीतिक परिदृश्य और मुख्य दावेदार
अब चुनाव का मैदान पहले से काफी बदल चुका है:
बीएनपी — पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के नेतृत्व वाली पार्टी को चुनाव का मुख्य दावेदार माना जा रहा है।
जमात-ए-इस्लामी — लंबे समय से प्रतिबंधित इस्लामी पार्टी ने भी राजनीतिक गतिविधि शुरू कर दी है।
नेशनल सिटिज़न पार्टी (NCP) — 2024 के आंदोलन के बाद उभरने वाली नई राजनीतिक ताकत, हालांकि संसाधनों और संगठन की कमी से जूझ रही है।
इस चुनाव का परिणाम बांग्लादेश के राजनीतिक संतुलन, लोकतांत्रिक ढांचे और सुरक्षा स्थिरता पर बड़ा असर डाल सकता है। युवा मतदाता, राजनीतिक सुधार की मांग, सुरक्षा चिंताएँ और संविधान संशोधनों को लेकर हो रहा जनमत संग्रह — ये सभी इस चुनाव को साधारण से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बनाते हैं।
12 फरवरी का चुनाव बांग्लादेश के लिए एक निर्णायक क्षण है — यह तय करेगा कि देश कैसे वापिस लोकतांत्रिक शासन की ओर बढ़ता है और क्या पुराने राजनीतिक धुरी (जैसे अवामी लीग) भविष्य में फिर से शक्ति में लौट पाएंगे या नहीं। अवामी लीग के बिना चुनावी प्रतिस्पर्धा न केवल राजनीतिक बलों के संतुलन को बदल रही है बल्कि बांग्लादेश की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न उठा रही है।








